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*Big Breaking jashpur:- जशपुर में धान खरीदी का ‘महाघोटाला’: ₹6.55 करोड़ के गबन में 6 अधिकारियों पर FIR, जिले के अन्य केंद्रों पर भी गहराया शक..!*

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​जशपुर/कोतबा। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से धान खरीदी व्यवस्था में भ्रष्टाचार की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे को हिलाकर रख दिया है। खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, कोनपारा में भारी अनियमितता उजागर हुई है। इस मामले में ₹6,55,26,979.40 (छह करोड़ पचपन लाख से अधिक) के आर्थिक गबन के आरोप में 6 जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ थाना तुमला में अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
​यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित (अपैक्स बैंक) के नोडल अधिकारी राम कुमार यादव की लिखित शिकायत के बाद की गई है।

​इन 6 चेहरों पर गिरी गाज: FIR दर्ज
​शासन के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में पुलिस ने निम्नलिखित आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 318(4), 320, 336, 338 एवं 61 के तहत मामला दर्ज किया है:
​भुनेश्वर साय – प्राधिकृत अधिकारी
​जयप्रकाश साहू – समिति प्रबंधक
​शिशुपाल यादव – फड़ प्रभारी
​नितेन्द्र साय – कम्प्यूटर ऑपरेटर
​अविनाथ अवस्थी – सहायक फड़ प्रभारी
​चन्द्रकुमार यादव – सह सहायक फड़ प्रभारी
​जांच में खुली पोल: कागजों में ‘धान’, हकीकत में ‘मैदान’ खाली
​संयुक्त जांच दल द्वारा जब धान खरीदी केंद्र कोनपारा का भौतिक सत्यापन किया गया, तो आंकड़ों के मायाजाल का पर्दाफाश हुआ।
​ऑनलाइन रिकॉर्ड में खरीदी: 1,61,250 क्विंटल
​मिल एवं संग्रहण केंद्र में परिदान: 1,40,663.12 क्विंटल
​गायब (शॉर्टेज) धान: 20,586.88 क्विंटल जांच अधिकारियों को मौके पर रिकॉर्ड के अनुसार शेष बचा हुआ धान कहीं नहीं मिला। यह स्पष्ट हो गया कि कागजों में फर्जी एंट्री कर करोड़ों रुपये के धान का हेरफेर किया गया है।
​करोड़ों की क्षति का पूरा गणित
​घोटाले की राशि केवल धान तक सीमित नहीं है, बल्कि बारदाने में भी बड़ी हेराफेरी पाई गई है:

मद (Description) मात्रा/संख्या गणना (दर) कुल राशि (₹)
लापता धान 20,586.88 क्विंटल ₹3100 प्रति क्विंटल 6,38,19,328.00
नया बारदाना 4,898 नग ₹71.80 प्रति नग 3,51,676.40
पुराना बारदाना 54,239 नग ₹25 प्रति नग 13,55,975.00
कुल आर्थिक क्षति।

प्रशासनिक इकबाल पर सवाल: क्या केवल कोनपारा ही शिकार है?

​सहायक आयुक्त सहकारिता एवं सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं के निर्देश पर FIR तो हो गई, लेकिन इस घटना ने जिले के अन्य उपार्जन केंद्रों की पारदर्शिता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

तीखे सवाल जो जवाब मांगते हैं:

​क्या इतना बड़ा घोटाला केवल इन 6 लोगों की मिलीभगत से संभव है, या इसमें उच्चाधिकारियों का मौन संरक्षण प्राप्त था?
​जिले के अन्य केंद्रों से आ रही धान की कमी की शिकायतों पर प्रशासन चुप क्यों है?
​क्या यह कार्रवाई केवल एक केंद्र तक सीमित रहकर ‘खानापूर्ति’ बनकर रह जाएगी?

किसान संगठनों की मांग:

स्थानीय किसान संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि जशपुर के सभी धान खरीदी केंद्रों की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। आशंका जताई जा रही है कि यदि हर केंद्र का भौतिक सत्यापन ईमानदारी से हो, तो यह घोटाला कई गुना बड़ा निकल सकता है।
*​निष्कर्ष*
​फिलहाल पुलिस मामले की विवेचना कर रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी की तैयारी जारी है। लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यही बना हुआ है कि क्या शासन की मंशा केवल छोटे मोहरों पर कार्रवाई करने की है, या फिर इस भ्रष्टाचार के पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त किया जाएगा? जिले की जनता की नज़रें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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