जशपुर/बगीचा। बीते 25 अप्रैल को बगीचा के दुर्गा पारा में डीडीसी गेंदबिहारी सिंह और एसडीओपी नक्सल ऑपरेशन के बीच हुए विवाद में आये उतार चढ़ाव के बाद आखिर कल 3 मई को कुल 9 दिनों के बाद मामले का पटाक्षेप हो गया। सनातन संत समाज के प्रतिनिधि गेंदबिहारी बिहारी सिंह के नेतृत्व में जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मिले और समझाइस के बाद जशपुर पुलिस ने फेसबुक पर प्रतिनिधिमंडल के साथ फोटो शेयर करते हुए पोस्ट में मामले में पुलिस की जांच से समाज सन्तुष्ट है लिखा। उक्त पोस्ट से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अब मामला समाप्त हो चुका है।लेकिन जिस तरह से मामले को प्रस्तुत करने और घटना का विरोध जताने की योजना भाजपा ने बनाई थी दरअसल उस कार्यप्रणाली पर आपत्ति दर्ज करते हुए भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता नन्दकुमार साय ने वीडियो जारी कर घोर आपत्ति जताई थी। गेंदबिहारी सिंह का मामला भले शांत हो गया लेकिन इस मामले में भाजपा ने जरूर एक वरिष्ठ आदिवासी नेता को खो दिया।
प्रारम्भ से ही यह आंदोलन बगैर सिर पैर के नजर आ रहा था क्योंकि कभी इसे भाजपा के जनप्रतिनिधि का अपमान तो कभी सनातन संत समाज का अपमान बताते हुए इसे बड़ा रूप देने का भी प्रयास किया गया।इस आंदोलन के दौरान जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग नेताओं के द्वारा किया गया था उस पर भी लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई थी कि ऐसी भाषा का प्रयोग कम से कम इस घटना में नहीं किया जाना चाहिए था। वैसे इस घटना को लेकर सरगुजा संभाग बन्द करने का प्रयास भी तकरीबन विफल ही रहा था। सूत्रों की माने तो घटना की चर्चा जिस तरह से प्रदेश में छिड़ी थी ऐसी स्थिति में एक वर्ग गेंदबिहारी बिहारी सिंह को आगामी विधानसभा हेतु जशपुर विधानसभा का एक सशक्त उम्मीदवार मानने लगा था। बताया जाता है कि जब ऐसी चर्चा शुरू हुई तब ही आंदोलन ने अपना रुख बदल दिया और पार्टी का एक वर्ग इस आंदोलन को बड़ा रूप देने से अपना हाथ खींच लिया कि कहीं इस आंदोलन का उल्टा फायदा गेंदबिहारी सिंह को न मिल जाए। वैसे भी भाजपा में आगामी चुनाव में प्रत्याशी चयन हेतु जो नियम तय किए गए हैं उसमें लगभग फिट बैठते हुए दिख रहे थे गेंदबिहारी सिंह।
बहरहाल जो भी हो जिस प्रकार से बड़े बड़े दावे आंदोलन के दौरान नेता कर रहे थे उन सभी दावों की कल इति श्री हो गई ।इस आंदोलन से भजपा के वरिष्ठ रणनीतिकारों को भी सबक लेना चाहिए कि सिर्फ युवा नेतृत्व का रट लगाते हुए वरिष्ठ नेताओं की राय के बगैर अगर कोई योजना बनाई जाएगी तब उसका परिणाम ऐसा ही होगा और सम्भवतः इस आंदोलन में यही कहना चाहते थे वरिष्ठ आदिवासी नेता नन्दकुमार साय, किन्तु उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया गया था। जिससे भी नाराज होकर श्री साय ने न केवल पार्टी छोड़ी बल्कि कांग्रेस प्रवेश तक कर लिया। खैर, उम्मीद है कि अब इस मामले में फिर से कोई आवाज नहीं उठेगी और मामला यहीं समाप्त हो जाएगा।
*बिग ब्रेकिंग:- एक वरिष्ठ नेता की बलि लेकर आखिर गेंदबिहारी सिंह मामले का पटाक्षेप हो ही गया, ग्राउंड जीरो ने पहले ही आगाह किया था कि इस आंदोलन का नहीं है कोई सिर और पैर,अंततः पुलिस अधीक्षक के साथ मिलकर संत समाज ने कर दिया मामले को समाप्त, अब आगे क्या होगी रणनीति?पढ़िए सिर्फ…*

