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*big breking jashpur:-मुख्यमंत्री के जशपुर से जाने से पहले ही सुरु हुआ विवाद…दरिंदों के दरिंदगी पर जब चुप रहे मुख्यमंत्री तो सोसल मीडिया में निकाल दिया भड़ास,छः दिब्यांग बच्चियों से प्रशिक्षण केंद्र में हुए बलात्कार मामले में पूर्ण रूप से कार्यवाही नही होने पर परिजनों का देखा गया आक्रोश,कहा मुख्यमंत्री महोदय हम विश्वास के साथ आपके पास गये थे परन्तु आज हमारा विश्वास टूट गया,मिली निराशा…. पढिये पूरी खबर*

जशपुरनगर:-मुख्यमंत्री जनचौपाल के तहत प्रदेश के मुख्यमंत्री बीते दो दिनों से जशपुर जिले के दौरे पर हैं।जहां उन्होंने कुनकुरी और जशपुर विधानसभा में अपनी जनचौलाप लगाई।जनचौपाल में बहुत से ऐसे लोग देखने को मिले जिन्हें शायद मुख्यमंत्री से अपनी बातें शेयर करने भी नही दिया गया।बहुत से लोग मुख्यमंत्री से मिल कर अपनी व्यथा सुनाना चाहते थे परन्तु उन्हें बोलने तक का मौका नही मिला।इसी बीच मुख्यमंत्री महोदय बीते शाम जशपुर विधानसभा के आस्ता गांव में जनचौपाल लगाया था, जहां उनसे वो लोग मिलना चाह रहे थे जिनके दिब्याँग बच्चियों के साथ दिब्यांग प्रशिक्षण केंद्र में ही वहीं के कर्मचारियों ने छः दिब्यांग बच्चियों के अस्मिता के साथ खिलवाड़ करते हुए अनाचार किया था,परन्तु उनकी बातें नही सुनी गई जिसके बाद परिजनों का आक्रोश इतना बढ़ गया की परिजनों ने सोशल मीडिया में ही प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री महोदय के खिलाफ खरी खोटी लिखना शुरू कर दिया।

पढिये दिब्यांग बच्चियों के परिजनों ने सोसल मीडिया में क्या कुछ लिखा है…..

“माननीय मुख्यमंत्री महोदय , आपके राज्य में हमारे 6 दिव्यांग बच्चियों के साथ हुई बर्बरता में संस्था के ही कर्मचारियों ने हैवानियत की हदें पार कर दी । लेकिन जिला प्रशासन ने निष्पक्षता पूर्वक जांच नहीं की है और बहुत सी समस्या को लेकर आज हम माननीय मुख्यमंत्री जी से मिलने आस्ता पहुंचे थे लेकिन हमने कितने कोशिश कि सीएम से मिलकर जांच के विषय में जो परेशानियां हो रही है।सीएम महोदय को अवगत कराना चाहते थे हमारा आवेदन पंजीयन भी हुआ और सीएम के पास कितनी बार बात करने की कोशिश की लेकिन किसी ने हमारी बात नहीं सुनी। मुख्यमंत्री महोदय हम जिस विश्वास के साथ आप के पास गए थे आज हमारा विश्वास टूट गया।हमें आज निराशा मिली धन्यवाद महोदय।”

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री आज भी जशपुर जिले में ही हैं वहीं उनके जशपुर से जाने से पहले सोशल मीडिया में इस तरह की बातें से आदिवासी समाज के दिब्याग बच्चियों के परिजनों के द्वारा लिखा जाना बहुत महत्व रखता है जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है की आने वाले समय मे विपक्ष इसे अपना मुद्दा बना सकता है।

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