जशपुरनगर। 108 संजीवनी एम्बुलेंस सेवा ने एक बार फिर अपनी त्वरित और समर्पित सेवा का परिचय देते हुए प्रसव पीड़ा से जूझ रही गर्भवती महिला और उसके नवजात की सुरक्षित जान बचाई। मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर रेफर की गई महिला का रास्ते में ही प्रसव हो गया, लेकिन 108 एम्बुलेंस में मौजूद ईएमटी की सूझबूझ और कुशलता से एम्बुलेंस ही प्रसूति कक्ष बन गई और सुरक्षित सामान्य प्रसव कराया गया।
जानकारी के अनुसार, 22 वर्षीय जितपति कुमारी, पति अजय उरांव, निवासी ग्राम जांगरडीह, पोस्ट नवाडीह (जिला गुमला), को प्रसव पीड़ा के बाद जशपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के दौरान महिला में गंभीर एनीमिया (हीमोग्लोबिन 6 ग्राम) पाया गया। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने बेहतर उपचार के लिए उन्हें मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर रेफर कर दिया।
महिला को 108 एएलएस एम्बुलेंस (CG03TR0085) से अंबिकापुर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान बगीचा से पहले राइकेरा मेन रोड पर प्रसव पीड़ा अचानक अत्यधिक बढ़ गई। हालात की गंभीरता को देखते हुए एम्बुलेंस में तैनात ईएमटी अतिसु तिर्की ने बिना समय गंवाए साहस, अनुभव और सूझबूझ का परिचय देते हुए एम्बुलेंस में ही सुरक्षित सामान्य प्रसव कराया।
प्रसव के बाद माँ और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ पाए गए। प्राथमिक उपचार देने के बाद दोनों को आगे की चिकित्सकीय देखभाल के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बगीचा में सुरक्षित भर्ती कराया गया।
इस पूरे अभियान में एम्बुलेंस चालक अनिल यादव ने भी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में सुरक्षित और समयबद्ध वाहन संचालन कर चिकित्सा टीम का पूरा सहयोग किया।
यह घटना 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा की तत्परता, टीमवर्क और मानव सेवा के प्रति समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। समय पर उपलब्ध चिकित्सा सुविधा, प्रशिक्षित ईएमटी की कुशलता और एम्बुलेंस कर्मियों की सजगता ने एक माँ और उसके नवजात को सुरक्षित जीवन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 108 सेवा की यह सराहनीय पहल एक बार फिर साबित करती है कि आपात स्थिति में यह सेवा लोगों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है।

