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*संघर्ष, जीवटता और जुनून की मिसाल- जनसंपर्क विभाग की महिलाएं निभा रहीं कई जिम्मेदारियां, परिवार, नौकरी और समाज के बीच सामंजस्य बनाकर लिख रहीं सफलता की नई कहानी*

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*रायपुर, 8 मार्च, 2026/*
आज के दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का परिचय दे रही हैं। जनसंपर्क विभाग में कार्यरत महिला अधिकारी और कर्मचारी भी अपने संघर्ष, जीवटता और जुनून से सफलता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। वे न केवल अपने कार्यालयीन दायित्वों को पूरी जिम्मेदारी और दक्षता के साथ निभा रही हैं, बल्कि परिवार और समाज के साथ भी बेहतर सामंजस्य स्थापित कर रही हैं।

जनसंपर्क विभाग की महिलाएं प्रशासन और आम जनता के बीच संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

सरकारी योजनाओं और उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए वे निरंतर सक्रिय रहती हैं। समाचार लेखन, फोटोग्राफी, कार्यक्रमों का समन्वय, मीडिया प्रबंधन और जनहितकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों को वे कुशलता से संभालती हैं।

इसके साथ ही घर की जिम्मेदारियों को निभाना भी उनके लिए उतना ही महत्वपूर्ण है। परिवार की देखभाल, बच्चों की पढ़ाई और सामाजिक दायित्वों के बीच संतुलन बनाते हुए वे अपने पेशेवर जीवन में भी निरंतर आगे बढ़ रही हैं। यह संतुलन उनके मजबूत आत्मविश्वास, समर्पण और सकारात्मक सोच का परिचायक है।

विभाग की महिला अधिकारी हर्षा पौराणिक, अंजू नायक, इस्मत जहाँ दानी, उषा किरण बड़ाईक, नीलिमा अग्रवाल, श्रुति ठाकुर, आरती सिंह, दानेश्वरी सम्भाकर, संगीता लकड़ा, कीर्ति पाराशर, तौकीर जाहिद, नूतन सिदार, आमना खातून, रचना मिश्र, वर्षा ठाकुर, देविका मरावी, मेघा यादव और भारती साहू जैसे अधिकारी राजभवन, मंत्रालय हो या फिर देश की राजधानी दिल्ली हो या प्रदेश की वीआईपी जिला जशपुर हो या दूरस्थ जिला बलरामपुर, सरगुजा, न्यायधानी बिलासपुर हो या संस्कारधानी राजनांदगांव हो या सतनाम के प्रवर्तक बाबा गुरुघासीदास के गृह जिला बलौदाबाजार- भाटापारा हो या देश की सबसे महत्वपूर्ण इस्पात संयंत्र स्थापित दुर्ग जैसे जिलों में जिम्मेदारियां संभाल रही हैं।

इसी तरह जनसंपर्क विभाग की सहयोगी संस्था छत्तीसगढ़ संवाद में क्रिएटिव कार्यों और शासन की प्रचार-प्रसार गतिविधियों में अपेक्षाकृत लो-प्रोफाइल में रहकर भी महत्वपूर्ण योगदान देने वाली गीतांजलि नेताम और अंजु मानिकपुरी जैसी कर्मयोगी महिलाएं भी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा से कर रही हैं। युवाओं के पसंदीदा साप्ताहिक पत्रिका रोजगार नियोजन की जिम्मेदारी विगत 24-25 बरस से निभा रही हैं। अवकाश दिवस हो या फिर कोई महत्वपूर्ण शासकीय अवसर, इन महिला कर्मियों की भूमिका और भी बढ़ जाती है।

सरकार, शासन, प्रशासन की महत्वपूर्ण योजनाओं, उपलब्धियों को आम लोगों तक पहुंचाने वाले इन महिला कर्मियों को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर याद करना उनके कार्यो, समर्पण का सम्मान है।

महिलाओं की यही मेहनत और लगन उन्हें समाज में एक अलग पहचान दिला रही है। आज वे केवल अपने परिवार की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की प्रेरणा बन रही हैं। उनके संघर्ष और सफलता की कहानियां यह संदेश देती हैं कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति और परिश्रम हो तो महिलाएं हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को हासिल कर सकती हैं।

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