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*जिला खाद्य विभाग के जिम्मेदार जनसूचना अधिकारी ने अधिवक्ताओं को भारत का नागरिक मानने से किया इंकार … RTI अधिनियम को लेकर छिड़ी बड़ी बहस, क्या अधिवक्ता भारत के नागरिक नही….?* *पढ़िए GROUND ZERO की ग्राउंड रिपोर्ट*

जशपुर:- जिले के खाद्य विभाग में एक नया मामला सामने तब निकलकर आया जब जिले के एक अधिवक्ता ने खाद्य शाखा जशपुर से सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदन लगाकर विभाग से खाद्य प्रकरण क्रमांक 1 /2021 के सम्बंध में जानकारी चाही। जिस पर खाद्य विभाग ने छतीसगढ शासन खाद्य नागरिक आपूर्ति एवम उप संरक्षण विभाग मंत्रालय महानदी भवन नया रायपुर अटल नगर जिला रायपुर के पत्र क्रमांक1925/1410/2020/29-1 नवा रायपुर दिनांक 16/9/2019 द्वारा जारी सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के अनुसार मार्गदर्शिका का अद्यतन की कंडिका 16 में संगठनों आदि को सूचना की आपूर्ति -अधिनियमके अंतर्गत सूचना का अधिकार केवल भारत के नागरिकों को प्राप्त है।अधिनियम में निगम ,संघ, कम्पनी आदि को जो वैध हस्तियों /व्यक्तियों की परिभाषा के अंतर्गत तो आते हैं,किन्तु नागरिक की परिभाषा में नही आते,को सूचना देने का कोई प्रावधान नहीं है।
उपरोक्त आधार पर आप वैध हस्तियों/व्यक्तियों की श्रेणी में आते हैं।अतः आपको सूचना के अधिकार अधिनयम2005 के अंतर्गत जानकारी दिया जाना सम्भव नहीं है । ज्ञात हो कि उक्त सम्बंध में अधिवक्ता श्री अमरेंद्र साव ने दिनांक10/12/2021 को आवेदन दिया था जिस सम्बन्ध में विभाग के द्वारा दिनांक 29/12/2021 को अधिवक्ता को उक्त पत्र प्रेषित कर सूचना देने से इंकार किया गया है ।अब इस पत्र में उल्लेखित उक्त बातों को लेकर देश मे एक नई चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर जो अधिवक्ता देश के लोगों को न्याय दिलाने में मदद करते हैं जो न्यायलय के अधिकारी माने जाते हैं आखिर उन्हें सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सूचना प्रदान करने से आखिर कैसे रोका जा सकता ।बहरहाल देखना यह होगा कि आखिर भारत सरकार के द्वारा निर्मित किसी कानून में क्या राज्य के किसी विभाग के द्वारा मागर्दर्शिका जारी किया जा सकता है ।और क्या सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत किसी अधिवक्ता को सूचना देने से इंकार किया जा सकता है यह चर्चा गर्म है। आप भीपढ़िए एक जिम्मेदार विभाग ने अपने पत्र में क्या लिखा है..।

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