कोतबा/जशपुर :- अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में धर्मनगरी कोतबा में गायत्री प्रज्ञा पीठ में पाँच कुण्डीय गायत्री महायज्ञ सह गायत्री मन्दिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन किया जा रहा है। 19 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ किया गया।
कलश यात्रा में 1100 से अधिक संख्या में महिलाओं व युवतियों ने सिर पर कलश लिए हिस्सा लिया। कलश यात्रा गायत्री मंदिर प्रज्ञा पीठ कोतबा परिसर से निकलकर मुख्य मार्ग होते हुए परशुराम चौक,बस स्टैण्ड, रायगढिया चौक, कारगिल चौक होते हुए सतिघाट धाम पहुंची जहाँ स्थित भैवनी नदी सतिघाट में पूजन कर कलश में जल भर कर नगर भ्रमण करते हुए वापस गायत्री मंदिर प्रज्ञा पीठ परिसर में समाप्त हुई। कलश यात्रा के दौरान समुचे धर्मनगरी कोतबा सहित आस पास के क्षेत्रीय गायत्री परिवार के अनुयायियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। कलश यात्रा के दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्रो के साथ भजन गायन करते हुए नगर भ्रमण कर भव्य कलश यात्रा की गई। गायत्री परिवार के सदस्यों ने बताया कि यह वर्ष शांतिकुंज की स्वर्ण जयंती वर्ष है और इस पावन घड़ी में हमारे धर्मनगरी कोतबा को अनायास ही अनुपम सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। जहाँ गायत्री प्रज्ञापीठ गायत्री मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन किया गया है। जिसमे पाँच कुण्डीय त्रिदिवसीय गायत्री महायज्ञ का शुभारंभ किया गया। 19 अक्टूबर मंगलवार की दोपहर 3 बजे कलश यात्रा के साथ महायज्ञ का शुभारंभ किया गया। जिसके बाद संध्या बेला में स्वागत कार्यक्रम व संगीत प्रवचन का कार्यक्रम किया गया। जिसमें प्रज्ञा बहनों द्वारा सुन्दर संगीतमय प्रवचन करते हुए कहा कि गायत्री माता सर्वसिद्धियोें को प्रदान करने वाली माता हैं उनकी साधना से मनुष्य भौतिक व आध्यात्मिक जगत में दिन प्रति दिन उन्नति करता है। ईश्वर को प्राप्त करने के लिए गुरु की आवश्यकता होती है। वही 20 अक्टूबर बुधवार को ब्रह्ममुहूर्त 5 से 6 बजे तक गायत्री माता की प्राण प्रतिष्ठा किया जाएगा जिसके बाद प्रातः 8 बजे से 12 बजे गायत्री महायज्ञ किया जाना है। वही संस्कार कार्यक्रम भी किया जाना है। दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक कार्यकर्ता गोष्ठी किया जाएगा वही शाम 5 बजे से 8 बजे दिप महायज्ञ व संगीत प्रवचन का कार्यक्रम आयोजन किया जाना है। वही 21 अक्टूबर गुरुवार को प्रातः 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक गायित्री महायज्ञ एवं पूर्णाहुति किया जाना है। जिसमे बाद समस्त टोली विदाई व समापन कार्यक्रम किया जाना है।