जशपुरनगर। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जशपुर जिले में अलग-अलग सड़क हादसों में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल जिला चिकित्सालय पहुंचाए गए। हादसों की सूचना मिलने के बाद नगर पालिका अध्यक्ष जशपुर अरविंद कुमार भगत मृतकों के परिजनों से मिलने और घायलों का हाल जानने जिला अस्पताल पहुंचे।
अस्पताल में मरीजों का हाल जानने के दौरान उन्हें अस्पताल की ड्यूटी व्यवस्था को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल के ड्रेसिंग रूम में पंकज मिंज नामक वार्ड बॉय कथित तौर पर नशे की हालत में घायल मरीजों की ड्रेसिंग कर रहा था। मौके पर उसकी स्थिति को लेकर सवाल उठे कि आखिर घायल मरीजों की ड्रेसिंग किसकी निगरानी में कराई जा रही थी और अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी है?
ड्यूटी डॉक्टर को भी नहीं थी जानकारी?
इस दौरान ड्यूटी पर मौजूद डॉ. विशाल मिंज मरीजों का उपचार कर रहे थे। संबंधित वार्ड बॉय के बारे में जानकारी लिए जाने पर कथित तौर पर डॉक्टर ने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि उक्त वार्ड बॉय ड्यूटी पर है या नहीं।
यही बात पूरे मामले को और गंभीर बना देती है।
अब सबसे बड़ा सवाल—जिम्मेदार कौन?
यदि संबंधित वार्ड बॉय ड्यूटी पर था, तो क्या कथित नशे की हालत में उसे घायल मरीजों की ड्रेसिंग करने की अनुमति दी गई थी?
और यदि वह ड्यूटी पर नहीं था, तो फिर ड्रेसिंग रूम में पहुंचकर वह घायल मरीजों की ड्रेसिंग कैसे कर रहा था?
क्या जिला अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों की निगरानी और उपस्थिति की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है?
मरीज और उनके परिजन बेहतर एवं सुरक्षित इलाज की उम्मीद लेकर जिला अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में इलाज से जुड़े कर्मचारियों की ड्यूटी और उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाला मामला सामने आना अस्पताल प्रबंधन के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
मौके पर मौजूद नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद कुमार भगत ने भी अस्पताल की व्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर की और पूरे मामले पर सवाल उठाए।
अब निगाहें अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर हैं। क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी? क्या यह स्पष्ट किया जाएगा कि संबंधित वार्ड बॉय ड्यूटी पर था या नहीं? और यदि जांच में लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
