
जशपुरनगर:-जशपुर विधायक विनय भगत के द्वारा चैत्र पूर्णिमा पर आयोजित सरहुल पूजा को लेकर प्रदेश के कद्दावर आदिववसी नेता पूर्व मंत्री, राष्ट्रीय संयोजक अखिल भारतीय जनजाति सुरक्षा मंच गणेश राम भगत जमकर बरसे श्री भगत ने सवाल उठाते हुए कहा कि आज से 50 साल पूर्व सरहुल का आयोजन वनवासी कल्याण आश्रम के नेतृत्व में जिस उद्देश्य से हुआ था वह आज भी दिखाई दे रहा है। श्री भगत ने कहा कि दीपू बगीचा के सरहुल पूजा के कार्यक्रम का नेतृत्व पड़हा समाज की ओर से कभी जशपुर विधायक विनय भगत के पिता रामदेव राम किया करते थे और उनके द्वारा सरहुल पूजा के मंच पर ईसाई मिशनरियों और पादरियों को बुलाकर भाषण कराने और जनजाति संस्कृति को दूषित करने का प्रयास किया जाने लगा जिसके विरोध में स्थानीय उरांव समाज के द्वारा वनवासी कल्याण आश्रम के सरना सरहुल पूजा समिति के माध्यम से वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर सरहुल पूजा का कार्यक्रम शुरू किया गया था।उन्होंने कहा कि उसके बाद से रामदेव राम के द्वारा सरहुल पूजा के अवसर पर मिशनरियों और पादरियों को बुलाना बंद तो किया गया किंतु वह परंपरा आज भी चलती आ रही है।इस वर्ष विनय भगत के द्वारा जो आयोजन सरहुल पूजा के नाम पर किया गया वह कहीं से भी सांस्कृतिक या धार्मिक आयोजन नहीं था बल्कि सिर्फ राजनीतिक रोटी सेकने का एक बहाना था।श्री भगत ने कहा कि राम नवमी के अवसर पर विनय भगत रामनवमी के जुलूस में भगवान राम के भजनों पर नाचते हुए शामिल हुए थे और रामनवमी के मंच पर हिंदुत्व का झंडा बुलंद करने की बात भी कही थी। लेकिन चैत्र पूर्णिमा आते आते आखिर उनके अंदर का हिंदुत्व कहां गायब हो गया सरहुल पूजा के दिन वनवासियों के आराध्य हनुमान जी का जन्मोत्सव था और पूरे देश में हनुमान जी की पूजा अर्चना की जा रही थी और राम नवमी के अवसर पर शहर के अंदर हनुमान जी के झंडे से पूरे शहर को सजाया गया था। लेकिन सरहुल पूजा के 1 दिन पहले विनय भगत के नेतृत्व में शहर में लगे हनुमान जी के झंडे को हटाकर उनके जगह पर ईसाई मिशनरियों के झंडे क्यों लगाए गए..?उन्होंने सवाल किया कि जब ईसाई मिशनरियों का सरहुल पूजा से कोई संबंध नहीं है उसके बाद भी पिकपों में भरकर गांव गांव से ईसाइयों और पादरियों को दीपू बगीचा क्यों लाया गया ? उन्होंने यह भी कहा कि कुनकुरी विधायक यू डी मिंज जो खुद ईसाई है उन्हें सरहुल पूजा में किस आधार पर शामिल किया गया ?जबकि इसके पूर्व भी पड़हा पुंप पत्रिका के विमोचन के नाम पर डिपू बगीचा में आयोजित कार्यक्रम में यू डी मिंज और मोहित केरकेट्टा को आमंत्रित किया गया था जिसका विरोध जिले के उरांव समाज ने किया था जिस पर कार्यक्रम को अन्यत्र किया गया था ।
एक तरफ तो पड़हा समाज के द्वारा यह आरोप लगाया जाता है कि सरहुल एक बार ही होना चाहिए दूसरी तरफ सरहुल के मंच को ईसाइयों को सुपुर्द कर दिया जा रहा है।ऐसे में जशपुर के उरांव कैसे एक मंच पर आएंगे ?
विदित हो कि उत्तरप्रदेश चुनाव परिणाम आने के बाद वायरल वीडियो में राम के भजन पर विधायक के द्वारा नाचने का एक वीडियो वायरल हुआ था। जिस पर विधायक और उनके समर्थकों के द्वारा उस पर जशपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।तब भी जशपुर विधायक पर राम का विरोधी होने का आरोप सोशल मीडिया में लगाया गया था।जिसके बाद विनय भगत के कई पोस्टर भगवान राम के चित्रों के साथ जशपुर में लगाये गए थे और अब उसके बाद यह नया विवाद फिर से उतपन्न हुआ है ।खबर लिखे जाने तक विधायक विनय भगत की ओर से कोई प्रतिक्रिया नही मिली है देखना यह होगा कि इस पर उनकी क्या प्रतिक्रिया आती है।
