जशपुरनगर। 24 मई 2026 को दिल्ली में आयोजित जनजातीय अस्मिता और सांस्कृतिक चेतना के ऐतिहासिक उलगुलान के बाद अब जनजातीय समाज अपने प्रतिनिधियों का पारंपरिक रीति से स्वागत करने की तैयारी में है। जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत ने सभी से अपने-अपने गांव में *’गोड़ धोवनी’* – पांव धोकर सम्मान – की परंपरा निभाने का आह्वान किया है।
*21 जून को जशपुर में होगा भव्य आयोजन:*
गणेश राम भगत ने बताया कि इसी क्रम में 21 जून 2026 को जशपुर के उरांव सामाजिक भवन, तेतर टोली में ‘गोड़ धोवनी’ का भव्य आयोजन किया जाएगा। इसमें दिल्ली उलगुलान में शामिल हुए सभी जनजातीय प्रतिनिधियों का पारंपरिक तरीके से सम्मान किया जाएगा।
*क्या है ‘गोड़ धोवनी’ परंपरा:*
गणेश राम भगत ने कहा कि ‘गोड़ धोवनी’ जनजातीय समाज की प्राचीन परंपरा है। समाज के लिए संघर्ष, सेवा और सामूहिक दायित्व का निर्वहन कर लौटे व्यक्तियों के पांव धोकर उनका स्वागत किया जाता है। यह सम्मान का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। दिल्ली से लौटे प्रत्येक प्रतिनिधि जनजातीय अस्मिता, संस्कृति और अधिकारों के संदेशवाहक हैं। उनका सम्मान करना समाज के सामूहिक संकल्प का सम्मान करना है।
*दिल्ली उलगुलान को बताया ऐतिहासिक:*
गणेश राम भगत ने 24 मई को दिल्ली में हुए जनजातीय सांस्कृतिक समागम को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि देशभर से आए जनजातीय प्रतिनिधियों, युवाओं, मातृशक्ति और वरिष्ठजनों के उत्साह से यह उलगुलान सफल रहा। यह समागम केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा, पहचान और अधिकारों की रक्षा का सामूहिक संकल्प था।

*सभी से की अपील:*
राष्ट्रीय संयोजक ने उम्मीद जताई कि दिल्ली गए सभी प्रतिनिधि सुरक्षित घर लौट चुके होंगे। उन्होंने समाज से अपील की कि अपने प्रतिनिधियों का पारंपरिक रीति से स्वागत करें और जनजातीय एकता व अधिकारों की रक्षा के अभियान को और सशक्त बनाएं।
