जशपुरनगर,कोतबा:-जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड अंतर्गत शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कन्या सुरंगपानी में छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न, अश्लील बातें और शराब के नशे में दुर्व्यवहार करने वाले प्रधान पाठक गणेश राम चौहान के खिलाफ खबर प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया है। मीडिया में खबर आते ही प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रधान पाठक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। हालांकि, इस निलंबन की कार्रवाई से पालक और ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि यह मामला केवल विभागीय नहीं, बल्कि गंभीर आपराधिक प्रवृत्ति का है, इसलिए आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही कर जेल भेजा जाना चाहिए।
कार्यालय संभागीय संयुक्त संचालक (शिक्षा), सरगुजा संभाग द्वारा जारी आदेश क्रमांक 3794 (दिनांक 28/11/2025) के अनुसार, जिला शिक्षा अधिकारी जशपुर के प्रतिवेदन के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि प्रधान पाठक गणेश राम चौहान द्वारा शराब का सेवन कर विद्यालय में उपस्थित होना, छात्राओं से अश्लीलतापूर्ण तरीके से बात कर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना और कर्मचारियों से गाली-गलौज करना प्रथम दृष्टया सही पाया गया है।
यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का स्पष्ट उल्लंघन है। विभाग ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, फरसाबहार नियत किया है।
विभाग द्वारा निलंबन आदेश जारी करने के बावजूद पालकों ने नाराजगी व्यक्त करते हुये इस कार्यवाही को नाकाफी बताया।
पालकों का कहना है कि प्रशासन निलंबन की कार्रवाई कर केवल औपचारिकता निभा रहा है।
पालकों का तर्क है कि, “दो दर्जन से अधिक नाबालिग आदिवासी छात्राओं के साथ यौन शोषण का प्रयास और मानसिक प्रताड़ना कोई साधारण विभागीय गलती नहीं है, बल्कि यह ‘पॉक्सो एक्ट’ (POCSO) और ‘एट्रोसिटी एक्ट’ के तहत एक गंभीर अपराध है।”
ग्रामीणों ने मांग की है कि विभाग को केवल निलंबन तक सीमित न रहकर पुलिस में एफआईआर (FIR) दर्ज करानी चाहिए थी।

*क्या था पूरा मामला..!*
ज्ञात हो कि सुरंगपानी स्कूल की छात्राओं और शिक्षिकाओं ने प्रधान पाठक पर गंभीर आरोप लगाए थे। छात्राओं का कहना था कि प्रधान पाठक स्कूल संचालन के समय सबके सामने शराब के नशे में उनके अंगों पर भद्दी टिप्पणियां करते थे, घर बुलाकर कपड़े धुलवाते थे और विरोध करने पर पंखे से उल्टा लटकाने की धमकी देते थे। शिक्षिकाओं को भी बस्तर ट्रांसफर कराने की धमकी दी जाती थी।
आरोपों में घिरे प्रधान पाठक ने मीडिया के सामने शराब पीने और “कहासुनी” की बात कबूली भी थी।
बड़ा सवाल यह है कि जब जांच में आरोपों की पुष्टि हो चुकी है और आरोपी ने खुद मीडिया के सामने और प्राचार्य को लिखित प्रतिवेदन देकर आंशिक रूप से अपना गुनाह कबूल किया है, तो पुलिसिया कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? क्या शिक्षा विभाग का निलंबन आदेश आरोपी को कानूनी शिकंजे से बचाने का एक रास्ता है, या प्रशासन पालकों की मांग पर एफआईआर दर्ज कर आरोपी को सलाखों के पीछे भेजेगा।
