जशपुर,सन्ना(राकेश गुप्ता की खास रिपोर्ट):- खबर जशपुर जिले के छोटे से गांव सन्ना में रहने वाली गांव की बेटी की है।जिसने सन्ना से बिलासपुर जा कर छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध अटल बिहारी बाजपाई विश्वविद्यालय बिलासपुर के दीक्षांत समारोह में सम्मानित हो कर गांव के लिए नया आयाम रच दिया है।हम बात कर रहे हैं सन्ना निवासी आफरीन खान की जिसके पिता अबु सहमा जो कि गांव के एक छोटे से किसान के रूप में हैं।जिन्होंने अपने बच्चों के लालन पालन के लिए हर सम्भव प्रयास किया,अबू सहमा ने मिर्च टमाटर की छोटी छोटी खेती करके अपने बच्चों को इस मंजिल तक पहुंचाया है।वहीं अबु सहमा की एक बेटी आफरीन खान है।जिसे पढाने के लिए समाज के बेड़ियों को तोड़ कर इस पिता ने अपनी बेटी को सन्ना से दूर बिलासपुर शहर में पढ़ने भेज दिया।बिलासपुर में बेटी के पढ़ने पर समाज ने चाहे जो कुछ भी कही हों पर आज जब इस बेटी की सम्मान बिलासपुर जैसे शहर में होते देख कर गांव में भी काफी उत्साह है। गाँव की इस बेटी को अटल बिहारी बाजपेयी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मास्टर ऑफ सांइस की उपाधि के साथ स्वर्ण पदक से नवाजा गया है।
आपको बता दें कि आफरीन खान विश्वविद्यालय शिक्षण विभाग (अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय, बिलासपुर) से एम.एस.सी माइक्रोबायोलॉजी एवं बायोइनफॉर्मेटिक्स की छात्रा थी। आफरीन खान को गुरुवार 21 अप्रैल को स्व.बी.आर यादव इनडोर स्टेडियम बहतराई, बिलासपुर छत्तीसगढ़ में हुए दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ डीएवीजी.के. कलाधर ने बताया कि आफरीन बहुत ही मेहनती और मेधावी छात्रा हैं।वहीं आफरीन ने हमारे ग्राउंड जीरो न्यूज से औपचारिक चर्चा में बताया कि उसके सफलता का श्रेय उसके माता सकिरण खातून पिता अबू सहमा खान एवं शिक्षकगण को जाता है। आफरीन ने बताया कि उसके माता-पिता बचपन से ही उसे बहुत सपोर्ट किया करते थे।कहा कि मुस्लिम समुदाय के लिए यह बहुत गर्व की बात है।वहीं आफरीन ने सन्ना क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए संदेश दिया है कि अपने माता-पिता के आशीर्वाद और सपोर्ट से सफलता प्राप्त करना संभव है तथा समाज में हर लड़की को शिक्षा की ओर आगे आने की अत्यंत आवश्यकता है।
