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*मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की बड़ी सौगात, बगिया समृद्धि एम कैड योजना बनेगा भारत देश का मॉडल प्रोजेक्ट, लिफ्ट एरिगेशन के माध्यम से पहुंचाया जाएगा किसानों के खेतों तक पानी, इस योजना से 13 ग्रामों के किसानों को मिलेगा इसका लाभ*

जशपुरनगर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने क्षेत्र के किसानों को बड़ी सौगात दी है, बगिया बैराज सह दाबित उद्वहन सिंचाई योजना से अब क्षेत्र के 13 गांव के कुल 4831 हेक्टेयर क्षेत्र को आधुनिक सिंचाई सुविधा से जोड़ा जाएगा। परियोजना के तहत पारंपरिक नहर प्रणाली के स्थान पर आधुनिक प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे जल उपयोग दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
परियोजना में शामिल 13 ग्रामों के प्रत्येक किसान का नाम, रकबा, सिंचित एवं असिंचित भूमि का विस्तृत विवरण संकलित किया जाए। उन्होंने कहा कि समृद्धि चौपाल के माध्यम से किसानों को परियोजना के लाभों से अवगत कराया जाएगा तथा फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि सिंचाई परियोजना का अधिकतम और समुचित उपयोग सुनिश्चित हो सके।इस परियोजना के लिए 95.89 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना के माध्यम से क्षेत्र के 13 ग्रामों—बगिया, मुस्कुटी, रजोटी, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, दोकड़ा, सिकरिया, पतरापाली, गरियादोहर, बीहाबल, नरियरडांड एवं ढुढरुडांड के 8454 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इसमें से 4831 हेक्टेयर खरीफ एवं 3623 हेक्टेयर रबी फसलों के लिए सिंचित किया जाएगा।
बगिया समृद्धि योजना का संचालन एवं संधारण जल उपभोक्ता समिति के माध्यम से किया जाएगा। परियोजना पूर्ण होने के पश्चात प्रारंभिक 5 वर्षों तक संचालन एवं संधारण कार्य ठेकेदार द्वारा किया जाएगा, इसके बाद यह जिम्मेदारी जल उपभोक्ता समिति को सौंपी जाएगी। समिति में महिलाओं की सहभागिता भी सुनिश्चित की गई है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य जल उपयोग दक्षता को बढ़ाना, पानी की हर बूंद का समुचित उपयोग करते हुए कृषि उत्पादन में वृद्धि करना तथा किसानों की आय में स्थायी सुधार लाना है। परियोजना में विद्युत आपूर्ति सौर ऊर्जा के माध्यम से की जाएगी। साथ ही जल के नियंत्रित एवं वैज्ञानिक उपयोग के लिए सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विज़िशन (SCADA) तथा इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन के श्री कृष्णन ने तकनीकी पहलुओं जानकारी देते हुए बताया कि इस परियोजना के माध्यम से सिंचाई परिसंपत्तियों—पाइप नेटवर्क संरचना एवं जल प्रबंधन—के संचालन में किसानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। डेटा एवं विश्लेषण के आधार पर यह निर्धारित किया जाएगा कि कहां, कब और कितना पानी देना है। उन्होंने कहा कि कृषि और सिंचाई एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। बेहतर सिंचाई व्यवस्था के साथ उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाकर किसानों को जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों से निपटने में सक्षम बनाया जा रहा है, जिससे दीर्घकालीन उत्पादकता, लाभप्रदता और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार सुनिश्चित होगा।

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