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*राष्ट्रपति के बाद PM मोदी से मिले आदिवासी नेता, गणेश राम भगत ने उठाया डीलिस्टिंग का मुद्दा: ‘फर्जी आरक्षण का खेल बंद करो’*

जशपुरनगर/ नई दिल्ली, 28 मई। डीलिस्टिंग आंदोलन की आग अब प्रधानमंत्री आवास तक पहुंच गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री और जनजातीय सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत के नेतृत्व में देशभर के आदिवासी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट कर ज्ञापन सौंपा।

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*फोटो में साफ दिख रहा है कि गणेश राम भगत PM मोदी को पुष्पगुच्छ भेंट कर रहे हैं और देश के विभिन्न राज्यों से आए आदिवासी नेता पारंपरिक वेशभूषा में मौजूद हैं।*

प्रतिनिधिमंडल में छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, मध्यप्रदेश, असम समेत 10 से अधिक राज्यों के जनजातीय समाज के प्रमुख शामिल थे। बैठक के दौरान PM मोदी ने *छत्तीसगढ़ का विशेष उल्लेख करते हुए* कहा कि आदिवासी संस्कृति, परंपरा और अस्मिता की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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*क्या है डीलिस्टिंग की मांग:*
ज्ञापन में मांग की गई है कि धर्मांतरण कर चुके लोगों को अनुसूचित जनजाति की सूची से तत्काल हटाया जाए। गणेश राम भगत ने कहा, “धर्म बदलने के बाद व्यक्ति की मूल पहचान, रीति-रिवाज और पूजा पद्धति बदल जाती है। फिर भी ST आरक्षण का दोहरा लाभ लेकर वे असली आदिवासियों का हक मार रहे हैं। यह संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।”

*24 मई के महासमागम का असर:*

भगत ने PM को 24 मई को लालकिला मैदान में हुए ऐतिहासिक ‘डीलिस्टिंग महासमागम’ की याद दिलाई, जिसमें 2 लाख से अधिक आदिवासी जुटे थे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी उस कार्यक्रम में शामिल हुए थे। “अब यह लड़ाई सड़क से संसद तक पहुंच चुकी है”, भगत ने कहा।

*गणेश राम भगत का बयान:*
“राष्ट्रपति महोदया के बाद आज हमने देश के प्रधानमंत्री के सामने छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश के आदिवासियों का दर्द रखा है। छत्तीसगढ़ से उठी यह चिंगारी अब जन-आंदोलन बन गई है। हमारा एक ही नारा है- धर्म बदलो तो आरक्षण छोड़ो। ST का लाभ सिर्फ उनको मिले जो अपनी जड़ों से जुड़े हैं।”

*PMO का रुख:*

सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय ने ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए उचित कानूनी परीक्षण का आश्वासन दिया है। प्रतिनिधिमंडल ने संसद में इस मुद्दे पर कानून बनाने की मांग की है।

इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद धर्मांतरण कर ST का लाभ ले रहे समूहों में हड़कंप मच गया है। डीलिस्टिंग समर्थकों का दावा है कि अब आर-पार की लड़ाई शुरू हो चुकी है।

*फोटो कैप्शन:*
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपते जनजातीय सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत। साथ में देशभर से आए आदिवासी समाज के प्रतिनिधि।

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