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*महाकुल समाज गरियादोहर में भव्य श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का हुआ आयोजन, लड्डू गोपाल को झूले में झुलाकर माखन-मिश्री के साथ लगाया गया 56 भोग, नगर कीर्तन के साथ हुआ भव्य समापन*

जशपुरनगर/दोकड़ा। महाकुल समाज गरियादोहर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव को लेकर शुक्रवार को भव्य एवं श्रद्धापूर्ण आयोजन किया गया। करीब 200 वर्षों से चली आ रही इस ऐतिहासिक परंपरा को समाज के लोगों ने पूरे उत्साह, श्रद्धा और भक्ति के साथ निभाया।जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भगवान लड्डू गोपाल को विधि-विधान से झूले में झुलाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग अर्पित करने के साथ छप्पन भोग लगाया।श्री कृष्ण जी की विशेष पूजा-अर्चना के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

*भजन-कीर्तन से गूंजा गरियादोहर*

शुक्रवार रात भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान भजन-कीर्तन एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालु देर रात तक भक्तिरस में डूबे रहे। नन्द उत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में उत्साहपूर्वक भाग लिया और एक-दूसरे को बधाई दी।

*भव्य मटकी फोड़ कार्यक्रम बना आकर्षण का केंद्र*

जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान मटकी फोड़ कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप और उनकी माखन चोरी की लीला की याद दिलाने वाले इस कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं श्रद्धालु जुटे। मटकी फोड़ के दौरान पूरा वातावरण ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष से गूंज उठा।

*नगर भ्रमण के दौरान घर-घर हुआ श्रीकृष्ण का पूजन*

महोत्सव के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की नगर भ्रमण यात्रा भी निकाली गई। नगर भ्रमण के दौरान श्रद्धालुओं ने अपने-अपने घरों के सामने भगवान श्रीकृष्ण का स्वागत किया तथा विशेष पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। घर-घर में भगवान को श्रद्धापूर्वक भोग अर्पित किया गया।

*200 वर्षों से जीवंत है परंपरा*

महाकुल समाज गरियादोहर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन लगभग 200 वर्षों से लगातार किया जा रहा है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा ने आज भी अपनी पहचान और भव्यता को बनाए रखा है। समाज के बुजुर्गों से लेकर युवाओं और बच्चों तक सभी ने महोत्सव में उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।पूरे आयोजन के दौरान गरियादोहर का वातावरण भक्ति, आस्था और श्रीकृष्णमय बना रहा। महोत्सव ने समाज की धार्मिक आस्था के साथ-साथ पुरानी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत बनाए रखने का संदेश दिया।

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