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Jashpur

*big breking jashpur:-स्वास्थ्य विभाग को लेकर फिर शर्मसार हुआ जशपुर, पोस्टमार्टम के लिए वाहन के जुगाड़ के लिए दर दर भटकते रहे मृतिका के परिजन,स्वास्थ्य विभाग में नही सुधर रही है व्यवस्था,ज्वाइन कर,ड्यूटी से नदारद हैं डाक्टर, कागजो में तहसील बनने की कीमत चुका रहे हैं सन्नावासी*

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जशपुर/सन्ना. ( राकेश गुप्ता की रिपोर्ट।)  तहसील का दर्जा प्राप्त कर चुके सन्ना में बीते 15 घण्टे से शव के पोस्टमार्टम के लिए मृतिका के परिजन भटकने का शर्मनाक मामला सामने आया है। सन्ना के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र,भले ही कागजो में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रदेश सरकार ने घोषित कर दिया है। लेकिन यहां अब तक एमबीबीएस डॉक्टर उपलब्ध नही हो पाए हैं। नतीजा,पोस्टमार्टम के लिए,लोगो को बगीचा तक दौड़ लगानी पड़ रही है। ऊपर से सितम यह कि तहसील मुख्यालय में शव वाहन की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त इन अव्यवस्थाओ से आए दिन विवाद की स्थिति बन रही है।

*सड़क दुर्घटना में हुई थी महिला की मौत*

जानकारी के लिए बता दें कि सोमवार को सन्ना चंपा मुख्य मार्ग में क़ुरवा में बाइक के अनियंत्रित हो जाने से बाइक दुर्घटना ग्रस्त हो गई थी। इस दुर्घटना में बाइक चला रहे मुकेश राम की पत्नी रूपवती की घटना स्थल पर ही मृत्यु हो गई थी। वही बाइक चालक मुकेश राम घायल हो गया थे। उन्हें इलाज के लिए सन्ना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था जिसके बाद उसे अम्बिकापुर रिफर कर दिया गया है।

*शव बगीचा ले जाने का फरमान*

असमय अपने स्वजन को गवाने का दुख में डूबे मुकेश और उनके परिवार को स्वास्थ्य विभाग ने मृतिका रूपावती के शव को पोस्टमार्टम के लिए बगीचा लाने का फरमान सुना दिया। मृतिका के पिता सुखना राम ने ग्राउंड जीरो ई न्यूज को बताया कि निजी वाहन चालक शव को लेकर बगीचा जाने और वापस लेकर आने के लिए 12 हजार रुपये किराया मांग रहे हैं। आर्थिक तंगी की वजह से वो इतना भारी किराया चुकाने में समर्थ नहीं हैं। नन्हेंसर के पूर्व सरपंच जगमोहन भगत ने बताया कि मृतिका के परिवार बहुत गरीब है और वे निजी वाहन का किराया चुकाने में असक्षम है। इसलिए,अब तक पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका है। वे बीते 15 घण्टे से सन्ना अस्पताल में ही रुके हुए हैं।

*कागजी तहसील साबित हो रहा है सन्ना*

सन्ना को लगभग एक साल पहले प्रदेश की भूपेश बघेल सरकार ने तहसील घोषित किया था। लेकिन,अब तक यहां एक तहसीलदार को पोस्टिंग के अलावा कोई प्रशासनिक सुविधा उपलब्ध नही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी सुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का बोर्ड लगा कर,जिम्मेदारी की खानापूर्ति कर दी गई है। बताया जा रहा है कि यहां दो एमबीबीएस डॉक्टर को पोस्टिंग सरकर ने किया है। लेकिन इनमें से एक ने अब तक ड्यूटी ज्वाइन ही नहीं किया है,वही दूसरे ने ज्वाइन करने के बाद ही छुट्टी में निकल गए है। यह तथाकथित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक आरएमए के भरोसे संचालित किया जा रहा है।

*चिकित्सक कलेक्टर पर टिकी उम्मीद*

जिले की बदहाल स्वास्थ्य सुविधा में सुधार की उम्मीद चार दिन पूर्व जिले की कमान सम्हालने वाले कलेक्टर डॉ रवि मित्तल पर टिकी हुई है।कलेक्टर डॉ मित्तल,स्वयं एक चिकित्सक हैं। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि स्वास्थ्य सेवा में सुधार उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। यही कारण है कि उन्होंने कमान सम्हालते ही सबसे स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक ली थी। देखना होगा,पहाड़ी कोरवा बाहुल्य,सन्ना तहसील की तस्वीर चिकित्सक कलेक्टर कैसे सवारते हैं..?

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