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Chhattisgarh

*देखिये कैसे जशपुर की शांत फ़िज़ा में ज़हर घोलने की हुई कोशिश…. आदिवासियों में फूट डालने की नापाक हरकत को अंजाम दिया आदिवासी एकता परिषद ने…. हिन्दू धर्म के देवी देवताओं पर भद्दी टिप्पणी के अलावा ब्राह्मण समुदाय को गधा तो गांधीजी एवं नेहरू जी को बताया भ्रष्टाचारी… मोहन भागवत,सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति की कोई औकात नही जैसे वाक्यों का किया प्रयोग….और मंच पर ठहाके लगाते रहे जशपुर के यह अधिकारी,क्या मंचासीन करते हैं इन बयानों का समर्थन…?जशपुर के इतिहास में आज तक ऐसा जहरीला भाषण ना किसी ने दिया होगा और ना किसी ने सुना होगा,जिले के सैकड़ों कर्मचारी अधिकारीयों ने इस कार्यक्रम में किया है शिरकत…सोसल मीडिया में हो रहा वीडियो वायरल,ग्राउंड जीरो न्यूज में पढ़े पूरी खबर*

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जशपुरनगर:- 4 सितंबर 2022 को जशपुर के वशिष्ठ कम्युनिटी हॉल में राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद का 12 वां संयुक्त छत्तीसगढ़ राज्य अधिवेशन किया गया जिसमें मुख्य वक्ता थे प्रेम कुमार गेडाम जो अपने आप को राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद का राष्ट्रीय नेता बताते हैं। प्रेम कुमार गेडाम ने आर.एस.एस, बीजेपी और ब्राह्मण समुदाय पर आदिवासी समाज को बरगलाने का आरोप लगाया और हिंदू देवी देवताओं के ख़िलाफ़ कई आपत्तिजनक टिप्पणियाँ भी कीं। इस कार्यक्रम में जशपुर के राज्य शासन के बड़े अधिकारी जैसे रणजीत टोप्पो (सी.एम.ओ.जशपुर ), डॉक्टर आर रन केरकेट्टा, डॉक्टर उषा लाकड़ा, डॉक्टर अनुरंजन टोप्पो, आर.एस. मरकाम शामिल हुए। इसके अलावा ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हुए पास्टर कलीदान तिर्की, पास्टर सुधीर तिर्की, मुक्ति प्रकाश आदि शामिल हुए।

प्रेम कुमार गेडाम ने अपने सम्बोधन में कहा की ब्राह्मण गधे हैं जो 12हाथ, 10 पैर , 10 सर वाले आर्टिफ़िशल भगवान को मानते हैं।गेडाम ने हिंदू देवता हनुमान जी के बारे में टिप्पणी करते हुए यह कहा कि हनुमान को पूंछ थी उसके बाप को भी पूंछ थी पर उसकी मां को पूंछ क्यों नहीं थी । इससे यह पता चलता है कि हमेशा से ही ब्राह्मण समाज ने आदिवासी को हमेशा से ही विकृत घोषित किया है। हनुमान एक आदिवासी था और हमारा आदमी था और उसे विकृत बताकर ब्राह्मण ऊंचा दिखने की कोशिश करते हैं और यह भी कहा कि ब्राह्मण समाज राम और शबरी की कथा सुना कर हम लोगों से झूठा लगाओ दिखाने की कोशिश करता रहा है।गेडाम ने कहा की 15 अगस्त 1947 भारत का स्वतंत्रता दिवस नही बल्कि केवल ब्राह्मणों का स्वतंत्रता दिवस है जो हम आदिवासियों पे थोपा जा रहा है|

गेडाम ने भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी एवं भारत के प्रथम प्रधानमंत्री श्री नेहरू जी के बारे में टिप्पणी करते हुए यह कहा कि नेहरू एवं गांधी भारत के पहले 2 सबसे बड़े भ्रष्टाचारी ब्राह्मण थे । गेडाम ने कहा कि ब्राह्मणों ने मिलकर के 15 अगस्त 1947 को भारत की आजादी का स्वांग रचा पर असल में यह ब्राह्मणों की आजादी का दिन है। बाल गंगाधर तिलक ब्राह्मण था, गांधी बनिया पंडित था, नेहरु कश्मीरी पंडित था और इसी प्रकार अन्य ब्राह्मणों ने मिलकर के भारत की आजादी का नाटक किया और उसके बाद से आदिवासियों का दमन शुरू किया। भारत में कुल 3.5 प्रतिशत ब्राह्मणों की आबादी है पर नेहरू ने अपनी पहली सरकार में 47% ब्राह्मणों को रखा। इसी से यह साबित होता है कि किस प्रकार से आजादी के समय से ही आदिवासियों को दबाने एवं कुचलने का प्रयास किया जा रहा है।

गेडाम यहीं नहीं रुके उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी ने एक वानर दल खड़ा किया है जिसका नाम बजरंग दल है और मोहन भागवत या किसी और ब्राह्मण की इतनी औकात नहीं है कि मेरा कुछ बिगाड़ सके। गेडाम ने यह भी कहा कि डीलिस्टिंग और एनआरसी जैसे मुद्दे ब्राह्मणों द्वारा फैलाए गए जाल है जिसमें आदिवासियों को कुचला जाएगा। जनजाति सुरक्षा मंच जनजातियों की सुरक्षा करने के लिए नहीं बल्कि उनको डीलिस्ट करने के लिए बनाया गया है और जनजाति सुरक्षा मंच के मूर्ख नेताओं को यह समझ नहीं आता है कि उनको पीछे से चलाने वाले ब्राह्मण हैं।

इस पूरे कार्यक्रम की खास बात यह रही की स्टेज पर मौजूद छत्तीसगढ़ शासन के जशपुर के कई कर्मचारी पूरे कार्यक्रम के दौरान बैठकर कर ठहाके लगाते रहे और जोर-जोर से तालियां बजाते रहे। हद तो तब हुई जब गेडाम ने जब यह बोला कि नेहरू और गांधी भ्रष्टाचारी थे और सुप्रीम कोर्ट,राष्ट्रपति की कोई औकात नही जैसे शब्दों का खुल्लम खुल्ला भाषण दिया। तब जशपुर के वे भ्रष्टाचारी लोग ताली बजा रहे थे जो जिला अस्पताल के 12 करोड़ के घोटाले में शामिल हैं और जिन पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। जो ईसाई समुदाय बात-बात पर हिंदू ईसाई एकता की बात करता है उसी ईसाई समुदाय के फादर और पास्टर लोग बैठ कर के तालियां बजा रहे थे और जोर जोर से ठहाके लगा रहे थे। इसमें यह देखना वाली बात है कि क्या जशपुर का ईसाई डायसिस भी इन बातों का समर्थन करता है जो गेडाम ने सरेआम मंच से कहीं। शायद हां तभी ईसाई समुदाय के पास्टर और फादर बैठकर के तालियां बजा रहे थे और गेडाम के भाषण को समर्थन दे रहे थे। इस पूरे भाषण को सुनकर के यह तो बिल्कुल भी नहीं लगा कि यह मंच राष्ट्रीय आदिवासी एकता का है। बल्कि बल्कि यह अंदाजा जरूर लगाया जा सकता है कि आदिवासियों में फूट डालने की नीति की ओर अग्रसर है। जशपुर के इतिहास में आज तक ऐसा जहरीला भाषण ना किसी ने दिया होगा और ना ही किसी ने सुना होगा । अभी इस पर हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया आनी बाकी है क्योंकि यह कार्यक्रम एक बंद हॉल में हुआ था इसलिए अभी ज्यादातर लोगों को इस घटना के बारे में नहीं मालूम है। परंतु इस कार्यक्रम का पूरा वीडियो सोशल मीडिया पर उपलब्ध है जो अभी शहर के लोगों के बीच में खूब वायरल हो रहा है । अब देखना यह होगा कि शासन प्रशासन और हिंदू संगठन इस पर क्या रुख अपनाते हैं।

 

हमने जब इस मामले में जशपुर पुलिस अधीक्षक से बात किया तो उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम जशपुर में जरूर सम्पन्न हुआ है।जिस कार्यक्रम में हमारे पुलिस भी लगाई गई थी।परन्तु इस तरह का क्या बयान बाजी हुआ है कार्यक्रम का वीडियो देखने के बाद कुछ कहा जा सकता है।अब तक मामले की कोई शिकायत नही आई है।वहीं कार्यक्रम की क्या अनुमति थी यह तो कलेक्टर साहब ही बता पायेंगे।

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