IMG 20260909 WA0003

*रमसमा में कैटेकिस्टों के लिए दो दिवसीय सेमिनार, विश्वास, यूखरिस्त और मसीही जीवन की प्रामाणिक गवाही पर दिया गया जोर…*

जशपुरनगर। रमसमा पल्ली में कैटेकिस्टों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का मुख्य उद्देश्य कैटेचिस्टों के बुलाहट, उनकी जिम्मेदारियों तथा विश्वास के साक्षी के रूप में उनकी भूमिका को और अधिक स्पष्ट एवं सुदृढ़ करना था।

सेमिनार के मुख्य वक्ता फादर इग्नास एक्का, साधना केंद्र, बिलासपुर में सेमिनरियों के आध्यात्मिक निदेशक, थे। उन्होंने कैटेकिस्टों के बुलाहट और जिम्मेदारियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि कैटेकिस्ट का कार्य केवल धार्मिक शिक्षा देना नहीं है, बल्कि अपने जीवन और व्यवहार के द्वारा मसीह और उनके सुसमाचार का साक्षी बनना भी है।

उन्होंने पवित्र यूखरिस्त को प्रत्येक मसीही जीवन का स्रोत और शिखर बताते हुए कैटेकिस्टों को यूखरिस्त के प्रति गहरी श्रद्धा और प्रेम रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यूखरिस्त से ही मसीही अपने विश्वास, सेवा और मिशन के लिए आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करता है।

फादर इग्नास ने द्वितीय वाटिकन महासभा के दस्तावेजों, विशेषकर ‘लुमेन जेन्टियम’ (Lumen Gentium) और ‘अद जेन्टेस’ (Ad Gentes) का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक बपतिस्मा प्राप्त व्यक्ति अपने विश्वास की गवाही देने के लिए बुलाया गया है। इस संदर्भ में उन्होंने कैटेकिस्टों की विशेष जिम्मेदारी पर जोर दिया कि वे अपने जीवन में सुसमाचार के मूल्यों को अपनाकर दूसरों के लिए विश्वास के प्रेरणादायी उदाहरण बनें। उन्होंने ‘प्रेस्बिटेरोरुम ऑर्डिनिस’ (Presbyterorum Ordinis) का भी संदर्भ देते हुए कलीसिया के कार्यों में पुरोहितों और सामान्य विश्वासियों की सहभागिता तथा सहयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

सेमिनार के अंतिम दिन रायगढ़ धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष बिशप पौल टोप्पो ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने कैटेकिस्टों और लोकधर्मी को “एक अधिक प्रामाणिक मसीही जीवन कैसे जिया जाए” इस विषय पर गंभीर आत्मचिंतन के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने विश्वास को केवल शब्दों तक सीमित न रखते हुए उसे दैनिक जीवन, सेवा, प्रेम, क्षमा और दूसरों के प्रति जिम्मेदारी के माध्यम से व्यक्त करने का आह्वान किया।

समापन दिवस पर गिनाबहार डीनरी तथा रमसमा पल्ली के लोकधर्मी के प्रतिनिधियों ने भी सेमिनार में भाग लिया। इससे कैटेकिस्टों, पल्ली नेतृत्व और सामान्य विश्वासियों के बीच सहयोग तथा सहभागिता को और मजबूती मिली।

इस कार्यक्रम के मुख्य संयोजक फादर कंचन तिर्की, पल्ली पुरोहित, थे। पल्ली के अन्य पुरोहितों ने भी कार्यक्रम की सफलता में सहयोग दिया। कांग्रेगेशन ऑफ आवर लेडी ऑफ द गार्डन की सिस्टर मार्लिन एवं अन्य धर्मबहनों, युवा संघ के प्रतिनिधि तथा पल्ली के अन्य नेतृत्वकर्ताओं ने भी आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।

इससे पूर्व फादर प्रफुल बड़ा, प्रोफेसर, संत अल्बर्ट्स कॉलेज, रांची, द्वारा पल्ली स्तर पर Training of Trainers (ToT) कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इन दोनों प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य कैटेकीस्टों, युवा नेताओं और सामान्य विश्वासियों में नेतृत्व क्षमता, विश्वास की समझ तथा कलीसियाई जिम्मेदारी को मजबूत करना था।

लगातार आयोजित किए गए इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के फलस्वरूप रमसमा पल्ली और गिनाबहार डीनरी के प्रतिनिधियों को कैटेकेटिकल सेवा, धार्मिक अगुवाई और ईसाई जीवन की गवाही को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल हुई है। कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों के बीच इस नवीनीकृत संकल्प के साथ हुआ कि वे अपने विश्वास को अधिक प्रामाणिक ढंग से जिएंगे, मसीह के सुसमाचार के साक्षी बनेंगे और कलीसिया तथा समाज की सेवा में समर्पित भाव से योगदान देंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

-->