file 0000000007c481faa31ce10166e4bf6d

*प्रशासन ने नहीं सुनी पुकार तो उप सरपंच ने सड़क सुधारने की ली जिम्मेदारी, बुनियादी सुविधा को तरस रहा है बादलखोल अभ्यारण्य, बारिश की पहली बूंद के साथ टापू बन जातें हैं कई गांव…*

जशपुरनगरः बछरांव से गायलूंगा तक पहुंचने वाली सड़क पूरी तरह से दलदल में तब्दील हो चुकी है। इस कथित वन मार्ग से हो कर गुजरना स्थानीय निवासियों के लिए एक बुरा सपना बन चुका है। वन्य जीवों को सुरक्षित आश्रय स्थल देने के उद्देश्य से बादलखोल अभ्यारण्य स्थापित किया गया था। इस अभ्यारण्य क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों को आश्वस्त किया गया था कि अभ्यारण्य क्षेत्र में भी उन्हें बुनियादी सुविधाओं की कमी नहीं होगी। लेकिन स्वतंत्रता के 7 दशक बीत जाने के बावजूद अभ्यारण्य क्षेत्र के कई गांव सड़क,पानी,बिजली और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि सरकार को झकझोर कर रख देने वाली पत्थलगड़ी आंदोलन के बाद भी जिम्मेदारों की नींद नहीं खुल पाई है। बछरांव से गायूलंगा के बीच 10 बस्तीयां स्थित है। इन बस्तियों की जनसंख्या 7 हजार से अधिक होने का अनुमान है। गायलूंगा के उप सरपंच शिव बाबा का कहना है कि बछरांव से गायलूंगा एक कच्चे वन मार्ग से जुड़ा हुआ है। यह वन मार्ग बारिश के दिनों में पूरी तरह से कीचड़ में सन जाता है। इससे चार पहिया तो दूर सायकिल और पैदल गुजरना भी मुश्किल हो जाता है। इन सड़क को आवागमन के लायक बनाने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों दर्जनों पर कलेक्टर,विधायक,सांसद सहित सभी सरकारी शिविरों में गुहार लगा चुके हैं। लेकिन उनकी कहीं सुनवाई नहीं हुई है। सड़क की स्थिति जस की तश बनी हुई है।

*उप सरपंच ने सम्हाला मोर्चा -*

घने जंगलों के बीच निवास करने वाले इन 7 हजार लोगों की उपेक्षा से आहत गायलूंगा के उप सरपंच शिव बाबा ने सड़क को सुधारने के लिए फावड़ा लेकर मैदान में आ गए। उन्होनें आसपास के मुरूम व पत्थरों को उठा कर दलदल में तब्दील हो चुके सड़क को सुधारने का प्रयास किया। शिव बाबा का कहना है कि आखिर प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी यह क्यों नहीं समझते हैं कि बादलखोल अभ्यारण्य में वन्य जीवांे के बीच रहने वाले ग्रामीण भी इंसान हैं। उन्हें भी बुनियादी सुविधाओं की उतनी ही आवश्यकता है,जितने मैदानी क्षेत्र में रहने वालों को। उन्होनें बताया कि बरसात के दिनों में किसी की तबियत खराब हो जाने पर गांव से मुख्य सड़क तक मरीज को लेकर आने में ग्रामीणों को किन कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है,इसका जिम्मेदार अधिकारी शायद अनुमान भी नहीं लगा पाते है। इसलिए अब तक इस सड़क को चलने लायक बनाने में किसी ने रूचि नहीं दिखाई है। उप सरपंच ने चेतावनी दी है कि अगर अब भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी तो ग्रामीण कुदाल और फावड़ा लेकर स्वयं ही सड़क को सुधारने के लिए श्रमदान करेगें।

*इन सड़कों की भी स्थिति ठीक नहीं -*

लोटाडाँड़ से जोराजाम मागर्रू इस सड़क के बीच लगभग 4 किलोमीटर हिस्सा आज भी कच्चा है।

*बारिश में यहां दलदल बन जाती*

कलिया से साहिदाड़ पहुंच मागर्रू यह पूरा रास्ता कीचड़ में तब्दील हो गया है। बीच में आने वाले दुमहान रपटा में पुलिया न होने से नाला पार करना जानलेवा है।
गायलूँगा से बछराव मागर्रू यह भी पूरा रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है इस मार्ग पर डेंगूरजोर नाला में पुलिया नहीं है। थोड़ी सी बारिश में ही नाला उफान पर आ जाता है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

-->