*जशपुर/नई दिल्ली, 28 मई।* जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक एवं छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री गणेश राम भगत ने बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर धर्मांतरित जनजातियों को ST सूची से बाहर करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
*राष्ट्रपति ने याद किया छत्तीसगढ़*
राष्ट्रपति भवन में हुई इस मुलाकात के दौरान गणेश राम भगत ने राष्ट्रपति को आदिवासी प्रतीक चिन्ह भेंट किया। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें उड़ीसा का पारंपरिक गमछा भी भेंट किया। मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने छत्तीसगढ़ को लेकर पुरानी बातों को याद किया।
*2006 से चल रहा आंदोलन*
गणेश राम भगत ने राष्ट्रपति को बताया कि जनजाति सुरक्षा मंच के नेतृत्व में वर्ष 2006 से देश के विभिन्न क्षेत्रों में डीलिस्टिंग आंदोलन चल रहा है। मंच की मांग है कि धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को अनुसूचित जनजाति की सूची से डीलिस्ट किया जाए। इस आंदोलन को छत्तीसगढ़ सहित देशभर से भारी समर्थन मिल रहा है।
*24 मई को हुआ था महासमागम*
जशपुर के युवा नेता रोशन प्रताप सिंह और रामप्रकाश पांडेय ने बताया कि इसी क्रम में 24 मई को दिल्ली के लालकिला मैदान में ऐतिहासिक जनजाति सांस्कृतिक समागम आयोजित हुआ था। इसमें देशभर की 500 से अधिक जनजातियों के लगभग 2 लाख लोग शामिल हुए थे।
मुख्य अतिथि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस आयोजन को “जनजातीय कुंभ” की संज्ञा दी थी। उन्होंने कहा था कि गणेश राम भगत के नेतृत्व में चल रहा यह आंदोलन भगवान बिरसा मुंडा के उलगुलान के बाद सदी का सबसे बड़ा आंदोलन है।

*देशभर के प्रतिनिधि रहे मौजूद*
राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान गणेश राम भगत के साथ देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजाति प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
