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Jashpur

*अबकी सावन अपने आसपास के महादेव का करें दर्शन, इन शिवालयों का खास है महत्व, ग्राउंड जीरो ई न्यूज़ करा रहा परिचय*

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-सोनू जायसवाल

जशपुरनगर। सावन का महीना चल रहा है। महादेव भक्त सावन में शिवालयों की पदयात्रा की तैयारी में जुटे हैं ।आये दिन देश के शिवालयों में भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है ,लेकिन आज भी अपने शहर के आसपास स्थित अत्यंत प्राचीन शिवालयों तक शिवभक्त नहीं पहुँच पाते हैं। जिससे उन ऐतिहासिक शिवालयों का जीर्णोद्धार नहीं हो पाता है।कभी अत्यंत समृद्ध रहे शिवालय दूरस्थ स्थानों में रहने के कारण अपने जीर्ण शीर्ण हालत में पड़े हुए हैं ।अगर सावन के महीने में ऐसे उपेक्षित शिवालयों के दर्शन के लिए शिवभक्त पहुँचे तो इससे भक्तों को तो लाभ मिलेगा ही साथ ही साथ ऐसे शिवालयों का जीर्णोद्धार भी हो सकेगा। शहर के शिव मंदिर, बरटोली शिव मंदिर, जेल रोड स्थित शिव मंदिर, आरईएस कॉलोनी स्थित शिव मंदिर के अलावा जशपुर जिले में कई ऐसे शिवालय हैं, जिनका अपना एक अलग महत्व है। तो आइए इस सावन में अपने आसपास के शिवालयों का दर्शन करें, जिनका खास महत्व है:-

*फतेहपुर शिव मंदिर*

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जशपुर से सन्ना मार्ग पर जशपुर से लगभग 6 किमी दूर ग्राम फतेहपुर में स्थित है ,इस शिवमंदिर की स्थापना भगवान श्री राम ने वनवास के दौरान अपने हांथो से किया है ।मन्दिर के बाहर एकादश शिवलिंग भी स्थापित हैं।

किलकिलेश्वर महादेव

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तहसील मुख्यालय पत्थलगांव से 14 किमी दूर मांड नदी के तट पर स्थित किलकिलेश्वर महादेव क्षेत्रवासियों के लिए आस्था का केंद्र है। सोमवार को महाशिवरात्रि में जलाभिषेक करने यहां भी श्रद्धालुओं की काफी भीड़ जुटेगी। यहां जशपुर के अलावा रायगढ़, सरगुजा और ओड़िसा आदि जगहों से भी लोग दर्शन व पूजन के लिए यहां पहुंचते है। स्वयं भू शिवलिंग के प्रति लोगों को विशेष श्रद्वा है। किलकिलेश्वर महादेव का स्वयंभू शिवलिंग लाखों लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। किवदंतियों के मुताबिक यहां स्थापित शिवलिंग मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित ग्राम गोलाबुड़ा में हल चलाते समय ग्रामीणों को मिला था। ग्रामीणों द्वारा उसी स्थल पर शिवलिंग की पूजा-अर्चना शुरू कर दी गई।

*चरईडांड़ मंदिर*

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राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 43 में जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम चरईडांड़ का शिव मंदिर जिले के प्राचीन मंदिरों में से एक है। यहां के शिवलिंग की विशेषता है कि हर साल उसका आकार बढ़ रहा है। बड़ी संख्या में यहा लोग पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। यहां भी जलाभिषेक, रुद्राभिषेक व अन्य कार्यक्रम होंगे। इस शिवधाम में विवाह को लेकर खास मान्यता है।

कोतेबिरा धाम

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जिले के फरसाबहार विकासखंड में छत्तीसगढ़ और ओड़िसा की सीमा पर स्थित कोतेबीरा की मान्यता पाताल लोक के प्रवेश द्वार की है। मान्यताओं के अनुसार नागलोक में स्थित इस शिवधाम में स्थापित शिवलिंग की पूजा कालातंर में स्वयं देवदूतों द्वारा किया जाता था। महाशिवरात्रि में इस प्राचीनतम शिवालय में जलाभिषेक के साथ भगवान शिव का दुग्ध स्नान भी कराया जाता है। इस प्रसिद्व शिवधाम में रायगढ़,जशपुर जिले के साथ ओड़िशा और झारखंड के श्रद्वालु भी सैकड़ों की संख्या में जुटते हैं।

*टांगीनाथ धाम*

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झारखंड के गुमला जिले में जशपुर की सीमा से सटे झारखंड में स्थित टांगीनाथ मंदिर का पुरातात्विक महत्व है। यहां खुदाई में शिवलिंग सहित कई देवी-देवताओं की मूर्तियां निकलीं हैं। शिवरात्रि में यहां विशाल मेला लगता है। टांगीनाथ में दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए सोमवार को पहुंचेंगे।

*कैलाशनाथेश्वर गुफा*

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जिले के बगीचा से लगभग 22 किलोमीटर दूर स्थित कैलाश नाथेश्वर गुफा प्रदेश का प्रमुख पर्यटन स्थल है। शिवरात्रि में जिले के अलावा छत्तीसगढ़ के अन्य शहरों, झारखंड, ओड़िसा आदि स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हर साल यहां पहुंचते हैं। संत गहिरा गुरु की तपोभूमि में गंगाजल के समान पवित्र व निर्मल जल के साथ हिंदू धर्म के सभी संस्कार यहां संपन्न किए जाते हैं।

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राजपुरी जल प्रपात जशपुर जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर बगीचा में स्थित है।जहां भगवान शिव का स्वयं प्रकट हुए शिवलिंग स्थापित है।सावन मास में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।

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कोटा पहाड़ जिला मुख्यालय से महज 70 किलोमीटर दूर सन्ना क्षेत्र के छिछली अ में स्थित है।जहां के पहाड़ में भगवान शिव का स्वयं प्रकट शिव लिंग के साथ साथ भगवान परसुराम का फरसा जमीन में गड़ा हुआ है जो हमेशा बढ़ रहा है।ग्रामीणों की मान्यता है कि झारखण्ड में स्थित टांगीनाथ में भगवान परसुराम का एक फरसा है तो उसी का दूसरा हिस्सा का टुकड़ा कोटापहाड में गिरा था और वो लगातार जमीन से एक इंच से निकला और अभी वर्तमान में लगातार बढ़ता हुआ दिखता है अब इसकी लम्बाई लगभग डेढ़ फीट हो गयी है।यहां की मान्यता है कि यहां पूजा अर्चना करने से हर मन्नत लोगों की पूरी होती है।वहीं यहां एक अजूबा यह भी है कि मंदिर के आस पास सैकड़ों बेल का वृक्ष है जिनका पत्ती नाग के फन के आकार की दिखती है जिससे लोगों की आस्था और बढ़ जाती है।

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कोचा कोना जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर सन्ना क्षेत्र के डोभ ग्राम पंचायत में है जहां भगवान का अनेकों रूप देखने को मिलता है।जहां भगवान शिव का स्वयं प्रकट शिव लिंग है बताया जाता है कि यहां के पुजारी को भगवान शिव ने सपना दिया तब जा कर जंगल के बीच स्थित बहता जल के पास पुजारी ने देखा कि वाकई में वहां भगवान का शिव लिंग है जिसके ऊपर नाग भी अलग से है।वहीं उस आस पास अनेकों रहस्य भरी पत्थरें दिखती है।तो मान्यता है कि भगवान का विमान भी इसी स्थान पर रखा हुआ है।जहां से कुनकुरी तरफ का पूरा क्षेत्र देखने को मिलता है।हालांकि यह जगह थोड़ा खतरनाक है जहां बच्चों को सावधान हो कर जाना होता है।जहां गुफा भी स्थित है जहां कई भगवान के प्रतिरूप देखने को मिलते हैं।मान्यता यही की यहाँ की पूजा अर्चना से लोगों की तृप्ति मिलने के साथ साथ सारी मनोकामना पूरी हो जाती है।

*नन्हेंसर शिव मंदिर*

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नन्हेंसर शिव मंदिर जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दूर सन्ना तहसील अंतर्गत नन्हेंसर ग्राम पंचायत में स्थित है।जहां भगवान शिव का स्वयं प्रकट शिव लिंग है जहाँ दशकों से पूजा अर्चना होती है।जहां लोगों की मान्यता है कि हर मनोकामना पूरी होती है।वहिं वहां की शिव लिंग को कुछ दिन पूर्व किसी के द्वारा तोड़ कर ले जाया गया था।जिसके बाद इसकी शिकायत हुई और पुरा जिला प्रशासन एक्टिव हुआ फिर भी शिवलिंग निहि ढूंढ पाए परन्तु तीन दिन के बाद स्वयं रात में मंदिर के अंदर शिव लिंग वापस देखा गया।शिवरात्रि और सावन में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।

*एकम्बा शिव मंदिर*

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एकम्बा शिव मंदिर सन्ना तहसील मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर एकम्बा गांव में स्थित है जहां जिले का सबसे बड़ा शिव लिंग स्थित है।मान्यता है कि यह शिव लिंग लगातार बढ़ रहा है और अभी वर्तमान में यह लगभग 4 फिट की ऊंचाई में यह शिव लिंग है।जहां भक्तों की मान्यता है कि जब गांव में बारिस नही होती है अकाल पड़ने की स्थिति हो जाती है तब जहां के बैगा के द्वारा शिव लिंग पर गोबर लगा देने पर बारिश शुरू हो जाती है।जहां भी भक्तों की आस्था देखने को मिलती है।

*बूढ़ा महादेव बरटोली जशपुर*

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जशपुर के हृदय स्थल पर बरटोली में स्थित बूढ़ा महादेव अत्यंत प्राचीन शिवमंदिर है मान्यता है कि यह मन्दिर क्षेत्र का सबसे प्राचीन शिव मंदिर है जहाँ लगभग जमीन से लगभग दो फीट नीचे भगवान महादेव विराजमान है ।

*रुद्रपुर शिवलिंग*

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जशपुर से लगभग 15 किमी की दूरी पर झारखण्ड और छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा पर रुद्रपुर ग्राम स्थित हैं जहां एकादश शिवलिंग स्थापित हैं तथा मन्दिर के पास स्थित जंगल मे खुले आसमान के नीचे विशाल शिवलिंग स्थापित हैं मान्यता है कि कभी यहाँ विशाल शिवमंदिर हुआ करता था कालांतर में मन्दिर के टूट जाने के बाद भी शिवलिंग सुरक्षित है और वहीं स्थापित हैं मान्यता है कि ये शिवलिंग क्षेत्र के सबसे विशाल शिवलिंग हैं रुद्रपुर से लगभग 15 किमी की दूरी पर झारखण्ड का प्रसिद्ध तीर्थ टांगीनाथ है।

*सोमेशवर महादेव मंदिर भितघरा*

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बगीचा से लगभग 8 किलोमीटर दूर भितघरा में सड़क से करीब 200 फिट की ऊँचाई पर बाबा सोमेश्वर महादेव में भगवान शिव स्थापित हुए है। सोमेश्वर महादेव मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा इसी साल मार्च के महीने में हुई है। यह मंदिर करीब 200 फीट की ऊंचाई पर बनाया गया है। ऊंचाई पर चढ़ने पर सुकून का एहसास होता है। मंदिर का आकर्षण बढ़ाने और दूर से ही भगवान के दर्शन हो जाएं इसके लिए मंदिर प्रांगण में भगवान शिव व हनुमानजी की विशाल मूर्ति भी स्थापित की गई है। सावन सोमवार पर जिले के लगभग सभी शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है।

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नागलोक के ग्राम पंचायत डोंगादरहा के सेमेरढाब स्थित स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन कर जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है जशपुर जिले के विभिन्ना क्षेत्रों सहित रायगढ़ जिले व ओड़िसा के सीमावर्ती ग्रामों के श्रद्धालुगण बड़ी संख्या में पहुंच रहे है।यहां सावन के सोमवार व महाशिवरात्रि के दिन विशेष पूजन करने पदयात्रा कर पगडंडियों के सहारे श्रद्धालु पहुंच रहे है।यहां भैवनी नदी की जलधारा में शिवलिंग कई समय तक जलमग्न हो जाते है। इनके दर्शन के लिए भक्त बहती जलधारा में उतार कर पूजार्चना करते है।यहां की मान्यता की है यह स्वंयभू शिवलिंग मनोकामना लिंग है यहां जो भी आया उनकी मनोकामनाएं पूरी हो गई।

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